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Chaitra Navratri 2026: कलश स्थापना का सही तरीका क्या है? जानें नवरात्रि में कलश में क्या-क्या डालना चाहिए

Chaitra Navratri 2026

भूमिका:

चैत्र नवरात्रि 2026 का पावन पर्व शुरू हो चुका है। हिंदू धर्म में नवरात्रि के नौ दिनों का विशेष महत्व है, जिसकी शुरुआत ‘कलश स्थापना’ या ‘घटस्थापना’ से होती है। कलश को भगवान गणेश और ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि सही विधि से कलश स्थापित करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है। लेकिन अक्सर भक्त असमंजस में रहते हैं कि कलश में क्या-क्या डालना चाहिए और इसकी सही विधि क्या है?

इस लेख में हम आपको चैत्र नवरात्रि 2026 कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, आवश्यक सामग्री और स्टेप-बाय-स्टेप विधि के बारे में विस्तार से बताएंगे।

1. Chaitra Navratri 2026: कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

आज 19 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का पहला दिन है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कलश स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

  • घटस्थापना तिथि: 19 मार्च 2026, गुरुवार
  • शुभ मुहूर्त (सुबह): 06:15 AM से 07:30 AM तक।
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:55 AM से 12:45 PM तक (यह कलश स्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है)।

2. कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री (Samagri List)

कलश स्थापित करने से पहले इन चीजों को एकत्रित कर लें:

  1. मिट्टी या तांबे का कलश।
  2. साफ मिट्टी (मिट्टी के पात्र के लिए)।
  3. सात प्रकार के अनाज या जौ (जवारे बोने के लिए)।
  4. गंगाजल और शुद्ध जल।
  5. कलावा (मौली)।
  6. आम या अशोक के 5-7 पत्ते।
  7. जटा वाला नारियल।
  8. लाल कपड़ा (नारियल लपेटने के लिए)।
  9. अक्षत (बिना टूटे चावल)।

3. कलश के अंदर क्या-क्या डालना चाहिए? (Items to put inside the Kalash)

कलश के अंदर डाली जाने वाली चीजें सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। कलश भरते समय उसमें ये 5 चीजें जरूर डालें:

  • सिक्का: चांदी का या साधारण सिक्का (लक्ष्मी का प्रतीक)।
  • सुपारी: अखंडता और गणेश जी का प्रतीक।
  • दूर्वा (घास): पवित्रता और गणेश जी का प्रिय।
  • इलायची और लौंग: सुगंध और शुद्धता के लिए।
  • हल्दी की गांठ: सौभाग्य और आरोग्य का प्रतीक।

4. कलश स्थापना की सही विधि: स्टेप-बाय-स्टेप (Step-by-Step Vidhi)

Step 1: मिट्टी का पात्र तैयार करें

एक चौड़े मुंह वाले मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी भरें और उसमें जौ (जवारे) बो दें। इसके ऊपर थोड़ा पानी छिड़कें।

Step 2: कलश तैयार करें

कलश के गले पर कलावा (मौली) बांधें और उस पर रोली से ‘स्वास्तिक’ बनाएं। अब कलश में शुद्ध जल और गंगाजल भरें।

Step 3: कलश में सामग्री डालें

ऊपर बताई गई पांचों चीजें (सिक्का, सुपारी, दूर्वा, हल्दी, अक्षत) कलश के जल में डाल दें।

Step 4: पत्ते और नारियल रखें

कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें। एक नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर उस पर कलावा बांधें और उसे कलश के ऊपर इस तरह रखें कि उसका मुख आपकी ओर या ऊपर की ओर हो।

Step 5: स्थापना और संकल्प

अब इस कलश को जवारे वाले पात्र के बीचों-बीच स्थापित करें। हाथ में जल लेकर मां दुर्गा का ध्यान करें और नवरात्रि के नौ दिनों के व्रत व पूजा का संकल्प लें। अंत में धूप-दीप जलाकर कलश की आरती करें।

5. कलश स्थापना करते समय न करें ये गलतियां

  • दिशा का ध्यान: कलश को हमेशा ईशान कोण (उत्तर-पूर्वी दिशा) में स्थापित करें।
  • नारियल का मुख: नारियल का मुख कभी भी नीचे की ओर नहीं होना चाहिए, इससे शत्रु बढ़ते हैं। मुख हमेशा साधक की ओर रखें।
  • स्वच्छता: बिना स्नान किए या गंदे कपड़ों में कलश स्थापना न करें।
  • अंधेरा न रखें: जहाँ कलश स्थापित हो, वहां अखंड ज्योत जलाएं या पर्याप्त रोशनी रखें।

निष्कर्ष (Conclusion)

चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि देवी शक्ति के आह्वान का माध्यम है। जब आप पूरी श्रद्धा और सही विधि से कलश स्थापित करते हैं, तो घर का वातावरण शुद्ध होता है और मानसिक शांति मिलती है। आशा है कि यह जानकारी आपकी नवरात्रि पूजा को और भी मंगलमय बनाएगी।

जय माता दी!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या कलश को स्टील के लोटे में स्थापित कर सकते हैं?

शास्त्रों के अनुसार मिट्टी, तांबा, पीतल या सोने-चांदी के कलश को श्रेष्ठ माना गया है। स्टील या लोहे के कलश का उपयोग वर्जित है।

Q2. नवरात्रि खत्म होने के बाद कलश के पानी का क्या करें?

पूजा संपन्न होने के बाद कलश के जल को पूरे घर में छिड़कें और बाकी जल को किसी पौधे (तुलसी को छोड़कर) में डाल दें। सिक्का अपनी तिजोरी में रख लें।

Q3. कलश स्थापना किस दिन करनी चाहिए?

कलश स्थापना हमेशा नवरात्रि के पहले दिन (प्रतिपदा तिथि) को ही करनी चाहिए।

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