गेम-चेंजर सफलता: इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भारत की छलांग, पेट्रोलियम को पीछे छोड़ने की तैयारी
Electronics Exports
भारत की आर्थिक कहानी में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ा जा रहा है। एक दशक पहले, भारत मुख्य रूप से कच्चे माल और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता था। लेकिन आज, देश की निर्यात सूची में सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक्स है। यह क्षेत्र अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन गया है और जल्द ही पेट्रोलियम उत्पादों को पीछे छोड़कर दूसरे स्थान पर कब्ज़ा करने की तैयारी में है।
यह अभूतपूर्व वृद्धि केवल संख्याएँ नहीं हैं; यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ विजन की सबसे बड़ी सफलता का प्रमाण है। इस क्रांति का मुख्य इंजन है Apple के iPhone का भारत में विनिर्माण (Manufacturing)।
यह विस्तृत गाइड इस इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात क्रांति के कारणों, इसकी अभूतपूर्व वृद्धि के आँकड़ों, PLI (उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन) योजना के निर्णायक प्रभाव और भारत के लिए वैश्विक विनिर्माण केंद्र (Global Manufacturing Hub) बनने की रणनीति पर गहराई से चर्चा करती है।
1. निर्यात सूची में ऐतिहासिक छलांग
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। कॉमर्स मिनिस्ट्री के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार:
A. तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक बनना
- रैंकिंग में उछाल: इलेक्ट्रॉनिक्स, जो वित्तीय वर्ष 2022 में भारत की सातवीं सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी थी, वह तेज़ी से आगे बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025 की पहली छमाही (H1 FY26) में तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन गई है।
- बड़ी श्रेणियों को पीछे छोड़ा: इलेक्ट्रॉनिक्स ने रत्न और आभूषण, दवाएँ (Pharmaceuticals), और रेडीमेड गारमेंट्स जैसी पारंपरिक रूप से मज़बूत श्रेणियों को पीछे छोड़ दिया है।
B. वृद्धि के चौंकाने वाले आँकड़े
- तेज वृद्धि: H1 FY26 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 42% की भारी वृद्धि दर्ज की गई, जिसका कुल मूल्य $22.2 बिलियन रहा।
- पेट्रोलियम से मुकाबला: पारंपरिक रूप से भारत की दूसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी, पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात, 16.4% गिरकर $30.6 बिलियन रह गया है। यदि वर्तमान विकास दर जारी रहती है, तो विशेषज्ञ अनुमान लगाते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक्स FY28 तक पेट्रोलियम को पीछे छोड़कर भारत की दूसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन जाएगा।
2. क्रांति का इंजन: PLI योजना और Apple का योगदान
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में यह उछाल प्राकृतिक नहीं है; यह भारत सरकार की एक सोची-समझी औद्योगिक नीति—PLI (Production-Linked Incentive) योजना—का सीधा परिणाम है।
A. PLI योजना का निर्णायक प्रभाव
- प्रोत्साहन: PLI योजना ने उन वैश्विक कंपनियों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किए जो भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन करते हैं।
- घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा: इस योजना ने भारत को आयात-केंद्रित देश से बदलकर विनिर्माण-केंद्रित देश बना दिया है। आज, भारत में उपयोग होने वाले लगभग 98% मोबाइल फोन का निर्माण देश के भीतर होता है।
B. iPhone का बढ़ता प्रभुत्व
- Apple का फोकस: इस निर्यात बूम का मुख्य इंजन Apple है। Apple ने भारत को चीन के बाद अपना दूसरा सबसे महत्वपूर्ण विनिर्माण केंद्र बनाया है।
- रिकॉर्ड तोड़ निर्यात: H1 FY26 में, Apple ने भारत से रिकॉर्ड $10 बिलियन मूल्य के iPhones का निर्यात किया।
- कुल निर्यात में हिस्सा: Apple के iPhones ने भारत के कुल स्मार्टफोन निर्यात के 75% से अधिक और कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के 45% हिस्से में योगदान दिया।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विश्वास: यह सफलता दर्शाती है कि वैश्विक कंपनियाँ भारत पर बड़े पैमाने पर उत्पादन (Scale Manufacturing) और विश्वसनीयता (Reliability) के लिए भरोसा कर रही हैं, जिससे वे चीन जैसे एकल-केंद्रों पर अपनी निर्भरता कम कर रही हैं।
3. आत्मनिर्भर भारत का बढ़ता विजन
यह निर्यात सफलता केवल व्यापार संतुलन को नहीं बदल रही है; यह भारत के तकनीकी संप्रभुता (Technological Sovereignty) के लक्ष्य को मजबूत कर रही है।

A. स्वदेशी नवाचार और R&D
- 4G/5G स्टैक: भारत ने स्वदेशी रूप से विकसित 4G स्टैक का सफल विकास और तैनाती की है, जिससे यह अपने टेलीकॉम उपकरण बनाने वाले दुनिया के गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है।
- सेमीकंडक्टर मिशन: इलेक्ट्रॉनिक्स का अगला चरण है सेमीकंडक्टर (Semiconductor) निर्माण। India Semiconductor Mission (ISM) के तहत, भारत ने 7 नैनोमीटर (nm) प्रोसेसर डिजाइन करने में सफलता हासिल की है और ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित किया है। यह कदम भारत को जटिल चिप्स के लिए आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।
- सरकारी प्लेटफॉर्म्स: कवच (Kavach) (रेलवे टक्कर-रोधी प्रणाली) और UPI जैसे स्वदेशी समाधानों की सफलता ने दिखाया है कि भारत केवल सॉफ्टवेयर ही नहीं, बल्कि हार्डवेयर और डीप-टेक में भी नवाचार कर सकता है।
B. इलेक्ट्रॉनिक्स और AI का संयोजन
- भविष्य की मांग: AI के बढ़ते इस्तेमाल के लिए ऊर्जा-कुशल (Energy-Efficient) माइक्रोप्रोसेसरों की ज़रूरत होगी। सरकार ऐसे चिपसेट्स के विकास में ₹200 करोड़ का निवेश कर रही है जो CCTV कैमरा, सर्वर, और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) जैसे हाई-टेक अनुप्रयोगों को शक्ति देंगे।
- GCCs का योगदान: Google Cloud और Databricks जैसी कंपनियों के GCCs भारत में AI और इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर के तालमेल पर काम कर रहे हैं, जो इस क्षेत्र में नए नवाचारों को बढ़ावा देगा।
4. चुनौतियाँ और आगे का रोडमैप
इतनी बड़ी सफलता के बावजूद, भारत को अपनी गति बनाए रखने के लिए कुछ प्रमुख चुनौतियों का समाधान करना होगा:
- आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) जोखिम: भारत अभी भी कई कच्चे माल और जटिल घटकों के लिए चीन पर निर्भर है। Semicon 2.0 का अगला चरण इन कच्चे मालों के स्थानीयकरण (Localization) पर केंद्रित होना चाहिए।
- कौशल और प्रतिभा का अंतर: सेमीकंडक्टर निर्माण और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स R&D के लिए विशेषज्ञ इंजीनियरों की भारी मांग है। ITI और इंजीनियरिंग कॉलेजों को उद्योग की ज़रूरतों के हिसाब से अपने पाठ्यक्रम को तेज़ी से अपग्रेड करना होगा।
- वैश्विक व्यापार तनाव: अमेरिका से 50% टैरिफ जैसी व्यापारिक चुनौतियाँ भारतीय निर्यातकों के लिए अनिश्चितता पैदा करती हैं। भारत को EU, UK और ASEAN जैसे अन्य बाज़ारों के साथ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप देकर अपने निर्यात बाज़ार को और अधिक विविध बनाना होगा।
5. निष्कर्ष
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भारत की छलांग ‘विकसित भारत 2047’ के सपने का एक ठोस प्रमाण है। PLI योजना की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि सही सरकारी नीति और निजी क्षेत्र की भागीदारी से भारत वैश्विक विनिर्माण और नवाचार का केंद्र बन सकता है।
जल्द ही इलेक्ट्रॉनिक्स का पेट्रोलियम को पीछे छोड़कर भारत की दूसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बनना यह दर्शाएगा कि भारत एक नई, तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनने की राह पर मज़बूती से चल रहा है।
