गेम-चेंजर ONDC: ई-कॉमर्स के बाद अब फाइनेंस में भी UPI जैसा खुला नेटवर्क
ONDC Revolution
भारत की डिजिटल क्रांति में UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) एक विश्वव्यापी सफलता की कहानी है। अब, देश का ध्यान ई-कॉमर्स और वित्तीय सेवाओं की अगली लहर पर है: ONDC (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स)। यह सरकारी समर्थित पहल अब केवल सामान खरीदने और बेचने के तरीकों को नहीं बदल रही है, बल्कि म्युचुअल फंड, लोन और बीमा जैसे जटिल वित्तीय उत्पादों को भी UPI की तरह ही सहज और सर्वव्यापी (ubiquitous) बना रही है।
ONDC का मूल विचार ई-कॉमर्स को एक प्लेटफॉर्म-केंद्रित (Platform-Centric) मॉडल से हटाकर एक नेटवर्क-केंद्रित (Network-Centric) मॉडल में लाना है। इसका लक्ष्य है अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी कंपनियों के एकाधिकार को तोड़ना और छोटे व्यवसायों (MSMEs) को एक राष्ट्रीय बाज़ार तक सीधी पहुँच प्रदान करना।
यह विस्तृत गाइड ONDC के क्रांतिकारी प्रभाव, इसकी वर्तमान स्थिति, वित्तीय सेवाओं में इसके विस्तार और भारत के समावेशी डिजिटल भविष्य को आकार देने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर गहराई से चर्चा करती है।
1. ONDC: ई-कॉमर्स का लोकतंत्रीकरण (Democratization)
ONDC को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत DPIIT (उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग) द्वारा एक गैर-लाभकारी (Not-for-Profit) कंपनी के रूप में स्थापित किया गया है।
A. प्लेटफॉर्म बनाम नेटवर्क
- पारंपरिक प्लेटफॉर्म: अमेज़न या स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म पर, खरीदार और विक्रेता दोनों को एक ही कंपनी के ऐप पर होना ज़रूरी है। ये कंपनियाँ 15% से 30% तक ऊँचा कमीशन लेती हैं और डेटा पर नियंत्रण रखती हैं।
- ONDC नेटवर्क: ONDC एक ओपन प्रोटोकॉल पर काम करता है। इसका मतलब है कि एक खरीदार ऐप (जैसे Paytm) का उपयोग करके एक विक्रेता ऐप (जैसे किसी स्थानीय किराना स्टोर) से सामान खरीदा जा सकता है, भले ही दोनों अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर हों। यह UPI की इंटरऑपरेबिलिटी के समान है।
B. ONDC की सफलता के आँकड़े (प्रारंभिक 2025)
- विस्तार: ONDC नेटवर्क 600 से अधिक शहरों में फैल चुका है और 7 लाख से अधिक विक्रेताओं/सेवा प्रदाताओं को अपने साथ जोड़ चुका है।
- MSMEs का सशक्तिकरण: ONDC कमीशन को घटाकर 3% से 5% तक कर देता है, जिससे छोटे विक्रेताओं के लिए ऑनलाइन व्यापार करना किफायती हो जाता है। MSME-TEAM Initiative जैसी योजनाओं के तहत 5 लाख MSMEs को ONDC से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 50% महिला-नेतृत्व वाले व्यवसाय शामिल हैं।
2. ई-कॉमर्स से फाइनेंस की ओर: ONDC का अगला बड़ा कदम
ONDC की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यह UPI और Aadhaar जैसे भारत के मौजूदा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) पर आधारित है। अब, ONDC इसी DPI का उपयोग करके वित्तीय सेवाओं में प्रवेश कर रहा है, जिससे ‘वित्तीय इंटरनेट’ का निर्माण हो रहा है।
A. निवेश को समावेशी बनाना (Mutual Funds and Investments)
- खुले नेटवर्क पर म्यूचुअल फंड: ONDC अब म्युचुअल फंड निवेश को पारंपरिक प्लेटफॉर्मों के एकाधिकार से मुक्त कर रहा है। Zerodha, Kotak Mutual Fund, और Nippon India Mutual Fund जैसी बड़ी AMCs (एसेट मैनेजमेंट कंपनियाँ) ONDC नेटवर्क पर आ चुकी हैं।
- लाभ: अब कोई भी निवेशक किसी भी ONDC-सक्षम ऐप (जैसे Paytm, PhonePe) का उपयोग करके किसी भी AMC का फंड खरीद सकता है। यह छोटे वितरकों (small distributors) को भी कम लागत पर राष्ट्रीय स्तर पर काम करने का अवसर देता है, जिससे वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) और पारदर्शिता बढ़ती है।
B. छोटे व्यवसायों के लिए ऋण (Loans for MSMEs)
- ONDC और OCEN का एकीकरण: ONDC, OCEN (ओपन क्रेडिट एनेबलमेंट नेटवर्क) के साथ मिलकर काम कर रहा है।
- लाभ: ONDC प्लेटफॉर्म पर MSMEs के लेन-देन डेटा, बिक्री के आंकड़े और क्रेडिट हिस्ट्री को Account Aggregator (AA) Framework के माध्यम से सुरक्षित रूप से साझा किया जा सकता है। इससे बैंक और NBFCs छोटे व्यवसायों की साख (creditworthiness) का बेहतर मूल्यांकन कर सकते हैं और उन्हें 6 मिनट के भीतर पूरी तरह से डिजिटल, पेपरलेस लोन वितरित कर सकते हैं। यह MSMEs के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्हें अक्सर औपचारिक ऋण तक पहुँचने में मुश्किल होती है।
3. ONDC और UPI: DPI का सहजीवी संबंध (Symbiotic Relationship)
ONDC की सफलता सीधे UPI की सफलता पर निर्भर करती है। UPI ने साबित किया कि खुला (open), इंटरऑपरेबल (interoperable), और शून्य-शुल्क (zero-fee) बुनियादी ढांचा कैसे क्रांति ला सकता है।
| पहल | ONDC में महत्व |
| UPI | सभी लेन-देन का मुख्य माध्यम। UPI इंटीग्रेशन से ग्राहक बिना ऐप बदले भुगतान कर सकते हैं। |
| Aadhaar / DigiLocker | KYC, विक्रेता पहचान (Seller Identification) और दस्तावेज़ सत्यापन के लिए आधारभूत संरचना प्रदान करता है। |
| Bhashini | ONDC को कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराता है, जिससे ग्रामीण और भाषाई रूप से विविध उपभोक्ताओं तक इसकी पहुँच बढ़ती है। |
4. चुनौतियाँ और भविष्य का रोडमैप
ONDC को अभी भी एक विशाल बाज़ार को कवर करना है, और इसकी राह में कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं:
- विनियमन की कमी (Lack of Regulation): कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि UPI की तरह ONDC की सफलता के लिए भी RBI जैसा एक मजबूत नियामक (Regulator) निकाय होना चाहिए जो सभी ई-कॉमर्स प्लेयर्स को नेटवर्क से जुड़ने के लिए अनिवार्य कर सके।
- गुणवत्ता नियंत्रण: चूंकि नेटवर्क पर कोई भी विक्रेता जुड़ सकता है, इसलिए उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता (quality) और ग्राहक विवादों (dispute resolution) को संभालना एक बड़ी चुनौती है।
- जागरूकता: Tier 2 और Tier 3 शहरों के MSMEs को ONDC के लाभों के बारे में पूरी तरह से जागरूक करने के लिए व्यापक प्रशिक्षण और समर्थन की आवश्यकता है।

5. निष्कर्ष
ONDC भारत के डिजिटल भविष्य के लिए एक गेम-चेंजर है। यह न केवल ई-कॉमर्स में प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता ला रहा है, बल्कि वित्तीय सेवाओं को भी लोकतंत्रीकृत (democratized) कर रहा है। म्युचुअल फंड, लोन, और बीमा जैसे उत्पादों को एक खुले नेटवर्क पर लाकर, ONDC भारत को वित्तीय समावेशन के अगले स्तर पर ले जा रहा है।
यदि ONDC UPI के समान ही बड़े पैमाने पर विश्वास और उपयोग हासिल कर लेता है, तो यह भारत को $100 बिलियन की ई-कॉमर्स अर्थव्यवस्था और एक वैश्विक फिनटेक लीडर बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
